अकोला का एक ऐसा गांव जहां होती है रावण की पूजा
अकोला- कहा जाता है कि विजयदशमी यानी सत्य की असत्य पर जीत इस दिन राम ने रावण का वध करके सत्य पर विजय हासिल किया था विजयलक्ष्मी यह दिन भारत देश में रावण रूपी पुतले का दहन करके मनाया जाता है। कींतू अकोला जिले में एक गांव इसे अपवाद है अकोला का सांगोला ऐसा एक गांव जहां पर इस दिन रावण की पूजा की जाती है पूरे गांव में इस दिन रावण की पूजा करने को लोग इखट्टा होते है आरती की जाती है हार डाल कर विधिवत पूजा की जाती है।
महाराष्ट्र के अकोला जिले में सांगोला गांव अकोला शहर से करीब 45 किलोमीटर दूरी पर है हझार से 2000 के आसपास लोग रहने वाला सांगोला गांव रावण के गांव के रूप में पहचाना जाता है। गांव में प्रवेश करने पर दाई और एक चबूतरा बना हुआ है जिस पर काले रंग की भव्य मूर्ति दिखती है वह 10 मुखी रावण की मूर्ति करीब 300 वर्ष पहले स्थापना की गई है। इस मूर्ति को 10 मुंह है। दसो भी मुंह के मस्तिष्क पर मुकुट है। हाथ में तलवार है। मूर्ति को देख कर लगता है कि युद्ध की तैयारी में है। आखिर रावण की मूर्ति स्थापन कैसी कि गई इसका सही इतिहास नहीं है। लेकिन मूर्ति यहा तक कैसी लाई गई इस संबंध गांव वासी बताते हैं कि गां एक प्रतिष्ठित नागरिक ने मूर्तिकार को एक मूर्ति बनाने को कहा। मूर्तिकार द्वारा मूर्ति बनाई गई किंतु शिल्पकार द्वारा चाहिए वह ना बनाते हुए 10 मुखी रावण की मूर्ति को तैयार कर दिया गया। बताए गए अनुसार मूर्ति नहीं होने से गाववासी मूर्तिकार पर नाराज हो गए बैलगाड़ी पर मूर्ति को लेकर वह गांव में पहुंचे गांव की सीमा शुरू होते ही बैल रुक गए किसी भी हालत में बेलगांव गांव की भीतर प्रवेश नहीं कर रहे थे आखिर गांव वासियों ने गांव के बेस पर नारियल फोड़कर मूर्ति की स्थापना की। गांव का हनुमान मंदिर होने से यह मूर्ति गांव में नहीं गई ऐसी गांव वासियों की धारणा है। 10 मुखी रावण मूर्ति को एक पुजारी रोजाना पूजा करता है किंतु दशहरे में पूरा गांव रावण की पूजा करने को इखट्टा होता है।
महादेव की पूजा करने वाला रावण यह है दृष्ट प्रवृती का नहीं था ऐसा गांव वासियों का विचार है पहले से चली आ रही और पूर्वजों द्वारा कही गई अनुसार आज भी इस गांव में रावण की पूजा की जाती है यही परंपरा को लगातार शुरू रहेंगी ऐसा विश्वास गांव वासियों को है राम और रावण यह दो विचारधाराओ में फसकर सांगोला इस गांव के रावण का मंदिर अभी तक नहीं बन सका है किंतु गांव वासियों द्वारा आए हुए अनुभवों से सभा मंडप तैयार करने का मानस गांव वासियों का है।
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