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बहुजनो की माँ रमाईका त्याग बहुत ही महत्त्वपूर्ण है - संगीताताई रायबोले

बहुजनो की माँ  रमाईका  त्याग  बहुत ही  महत्त्वपूर्ण है -  संगीताताई रायबोले 
अकोला --  डॉ बाबासाहब आंबेडकर  विश्वमें  विद्वत्ता में  सबसे  आगे  हैं क्योंकि  बहुजनो की माँ  रमाई का  त्याग महत्त्वपूर्ण है। माँ  रमाईने डॉ बाबासाहबके   पढ़ाई में कोई भी रूकावटें नही होने दी। जिसके लिये अपनी खुद की जरूरतें और  संसार चलाने के लिए ,तथा परिवार की कोई भी  समस्या  डॉ बाबासाहब नही बताई ।इसलिए डॉ बाबासाहब की पढ़ाई पुरी हो सकी और बाबासाहब विश्व के महान विद्वान बन गये।ऐसे विचार आई रमाई जन्मोत्सव  कार्यक्रम में स्वागताध्यक्षा संगीता रायबोले   व्यक्त किये।  पिछले  10 सालोंसे  अशोक वाटिका प्रेरणाभूमी महिलासंघ तथा प्रेरणा भूमी ट्रस्टकी ओर से   अशोक वाटिका में माता रमाई जयंतीका  यशस्वी आयोजन किया जा रहा हैं। इससाल भी  बड़े पैमानेपर  आई रमाई जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
 इस कार्यक्रममें राजयके नामचीन वक्ताओं को विचार रखने के लिये बुलाया जाता हैं।इस साल  भारतीय संविधानके  अभ्यासक   अनंत भवरे  का   व्याख्यान संपन्न हुआ।  आई रमाई जन्मोत्सव कार्यक्रम का   उदघाटन  देवानंद पाटील  ने किया तो अध्यक्षता   पुरुषोत्तम वानखडे  ने की हैं। इस कार्यक्रममें  जिला परिषद अध्यक्षा सौ  प्रतिभाताई भोजने ,भारतीय बौद्ध महासभा  अध्यक्ष पी जे वानखडे,  स्वागताध्यक्ष जयश्रीताई  सोनवणे,दामोदर जगताप,प्रा एम आर इंगळे , अरुंधती सिरसाट,वंचित बहुजन आघाडी महिला जिल्हाध्यक्ष प्रभाताई सिरसाट ,संदीप भोवते, वंदनाताई वासनिक ,सुवर्णा जाधव,सुरेश मोरे ,बाळकृष्ण खंडारे, पार्षदा किरण बोराखडे, मंतोषताई मोहोड, बाबुराव वाघ,भाऊसाहेब थोरात,डॉ ज्ञा वा गवई,प्रभाकर कवडे,भगवान खंडारे,रमेश भगत ,पुरुषोत्तम अहिर, गजानन निखाडे ,गौतम गोपणारायन ,गजानन  सुरवाडे, सिध्दार्थ इंगळे,आदि  प्रमुख मेहमानके रूप में   उपस्थित थे।  सूत्रसंचालन  अशोक वाटिका प्रेरणाभूमी संघ महासचिव  संतोष रायबोले  ने किया तो  आभार प्रदर्शन  मंदाताई वाकोडे  ने किया ।कार्यक्रम सफल बनाने के लिये  लीलाताई सहस्त्रबुद्धे,प्रमिला गवई,सविताताई गवई,सुरेखा भोजने,कमलाबाई  डोंगरर्दिवे ,करुणाताई खंडारे,किरण इंगळे,संध्याताई पाटील ,दीपाली अबगड  , संगीता सुरवाडे ,लक्ष्मी खरात,सुनंदा प्रधान ,नंदा गवई  ,ललिता भगत ,मीरा खाडे,तिलोकतमा गवई,पूजा वानखडे  कांताई थोरात ,वंदना वानखडे, उषाताई सुरवाडे , सुनंदा सावदेकर,बेबीनंदा उजागरे, दुर्गाताई तायडे, आशा इंगळे, आदींने  परिश्रम लिये।

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