Teachers and school management were guided on the subject of National Education Policy 2020: नॅशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 विषय पर किया गया टीचर्स और स्कूल मैनेजमेंट का मार्गदर्शन
वहदत ए इस्लामी अकोला ने किया शिक्षा सेमिनार का भव्य आयोजन
अकोला- नई शिक्षा निती जो नेप 2020 से प्रचलित है उसे मौजूदा सरकार ने लागू कर दिया है. जिस के चलते समाज के विभिन्न वर्गो खास तौर से अल्पसंख्यकों में बेचैनी देखी जा रही है.इसका मुख्य कारण सरकार की हिंदुत्व वाली मानसिकता है. इसी उद्देश से नई शिक्षा निती को समझने और समझाने हेतु शिक्षा समिती वहदत ए इस्लामी हिंद, पूरबी रीजन महाराष्ट्र ,अकोला इकाई द्वारा शिक्षा सेमिनार आयोजित किया गया.
सेमिनार में खान मुहम्मद अज़हर हुसैन साहब (अध्यक्ष, उर्दू एजुकेशन सोसायटी, अकोला), सैय्यद इसहाक राही साहब (सी.ई.ओ, शाहबाबू एजुकेशन सोसायटी, पातुर), प्रशांत गावंडे साहब (ट्रस्टी, जे.आर.डी टाटा स्कूल एण्ड एजुलॅब, अकोला), मुनीर देशमुख साहब (हेड, स्कूल डेवलप्मेंट पर्ल एकेडमी, औरंगाबाद), डॉ तनवीर अहमद साहब (प्रोफ़ेसर एम.जी.एम यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद) और अन्य मान्यवर प्रमुखता से उपस्थित रहे.
इस सेमिनार में बोलते हुए खान मो.अज़हर हुसैन साहब ने कहा कि नई शिक्षा निती समाज के गरीब वर्ग के खिलाफ है जो गरीब वर्ग को शिक्षा से दूर कर देगी. अल्पसंख्यक वर्ग की स्कॉलरशिप बंद कर देना इसका ताजा उधारण है. प्रशांत गवांडे साहब ने कहा कि नई शिक्षा निती आर एस एस की बनाई हुई है जिसे सरकार ने लागू कर दिया है. हमें इसका विरोध करना चाहिए. इसहाक राही साहब ने इतिहास का उद्धरण देते हुए बताया कि ज़ोर जबरदस्ती से लागू कि गई कोई भी निती सफल नहीं होती.
डॉ तनवीर अहमद साहब ने अपने भाषण में कहा कि सरकार आर एस एस के एजेंडे को खूबसूरत बनाकर बड़ी चालाकी से लागू कर रही है.एक देश एक संस्कृति के नाम पर हिंदुत्व थोपना चाहती है.इस लिए हमे सतर्क रहना चाहिए. अंत में मुनीर देशमुख साहब ने कहा की सरकार के इस खतरनाक एजेंडा के विरुद्ध अल्पसंख्यक खास तौर से मुसलमानों को आवाज उठानी चाहिए. अपनी नई पीढ़ी की दीन व दुनिया की फिकर करना चाहिए.इसके लिए शिक्षक वर्ग बहुत उपयोगी साबित हो सकता है.दुआ पर इस सेमिनार का समापन हुआ. सेमिनार को सफ़ल बनाने में शिक्षा समिती के पदाधिकारियो ने अथक प्रयास किया.
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