अकोला में कई परिसरों की बत्ती हुई गुल...!
अकोला समेत राज्य में बिजली कर्मचारी हड़ताल पर गए
अकोला में विद्युत भवन के सामने किया प्रदर्शन
अकोला-राज्य के 86 हजार से ज्यादा बिजली कर्मचारी आज से तीन दिनों के लिए बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। अकोला शहर में दोपहर 1:00 बजे के बाद कई परिसरों की बत्ती गुल हो गई जो 2:00 बजे तक नहीं आई थी जिसके चलते नागरीक परेशान नजर आए।
इसमें अकोला जिले की भी अधिकांश बिजली अधिकारियों व कर्मियों का समावेश है आज (4 जनवरी, बुधवार) रात 12 बजे से महाराष्ट्र की महावितरण, महापारेषण और महानिर्मिति कंपनियों से जुड़े 86 हजार बिजली कर्मचारी, अधिकारी और अभियंता स्ट्राइक पर चले गए हैं। फिलहाल यह हड़ताल 72 घंटों के लिए की जा रही है। ये कर्मचारी बिजली कंपनियों के निजी करण का विरोध कर रहे हैं। तथा अदानी अंबानी को फायदा होने की मंशा होने का दिखाई देने का वह कह रहे हैं। उसी तरह आज दोपहर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक है।
इस बैठक में कर्मचारियों का अगला रुख साफ हो सकेगा। अकोला शहर में बड़ी संख्या में दुर्गा चौक महावितरण के सामने बिजली कर्मचारी वह अधिकारी अभियंता यह निजी करण का तीव्र विरोध करते हुए नजर आए साथ में उन्हें विभिन्न संगठनों ने भी समर्थन दिया। इस वक्त उन्होंने जो कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल नहीं है उनसे भी जल्द से जल्द शामिल होने की अपील की गई। आपको बता दे की, इससे पहले बिजली कर्मचारियों की संघर्ष समिति की प्रधान उर्जा सचिव और तीनों कंपनियों के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर के साथ सोमवार (2 जनवरी) को एक अहम बैठक हुई। बैठक में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने की वजह से बिजली के कर्मचारी संगठनों की संघर्ष समिति ने तीन जनवरी की आधी रात से हड़ताल पर जाने का फैसला किया। जिससे अकोला समेत पूरे राज्य में के बिजली अभियंता कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं।
निजीकरण के विरोध में हड़ताल
पिछले डेढ़ महीने से बिजली कर्मचारियों की संघर्ष समिति कंपनियों के निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रही थी। नागपुर में जब विधानसभा का शीत कालीन सत्र शुरू था तब 35 हजार बिजली कर्मचारियों ने विधानसभा के बाहर विरोध मार्च निकालकर अपना विरोध दर्शाया था सूत्रों द्वारा मिली जानकारी अनुसार कर्मचारियों को इस बात की जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र सरकार अडानी ग्रुप को इन कंपनियों के समांतर बिजली वितरण की इजाजत देने जा रही है। जिसके चलते कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। राज्य सरकार से उन्हें अब तक ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है कि महाराष्ट्र में बिजली कंपनियों का निजीकरण नहीं किया जाएगा।आज अब देखना यह है कि दोपहर को उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ होनेवाली मीटिंग में क्या फैसले किए जाते हैं।
72 घंटे तक चलेगी हड़ताल
फिलहाल हड़ताल 72 घंटे तक चलने वाली है। इसमें तीन अहम बिजली कंपनियों के 86 हजार से ज्यादा बिजली कर्मचारी, अधिकारी और इंजीनियर भाग ले रहे हैं। इनके अलावा 40 हजार से ज्यादा मानधन में काम कर रहे कर्मचारी भी शामिल हैं। इनकी मांग है कि सरकार अडानी ग्रुप जैसी कंपनियों को इन कंपनियों के समांतर बिजली वितरण करने की इजाजत ना दे। महानिर्मिती कंपनी के मालिकाना हक वाले जल विद्युत केंद्र को निजी कंपनियों के हाथ बेचने की कोशिश ना की जाए। हड़ताल में शामिल हो रही तीनों कंपनियों के 42 हजार रिक्त पदों पर कर्मचारियों की भर्ती की जाए। ऐसी विभिन्न मांगे बिजली कर्मचारियों द्वारा रखी गई है।
अखिल भारतीय विश्वकर्मा विराट संघटना का समर्थन
संघर्ष समिति द्वारा बुलाई गई हड़ताल में महाराष्ट्र विश्वकर्मा विराट संगठन ने अपना जाहिर समर्थन देकर शामिल होने का एक पत्रक द्वारा कहा वह उसके पदाधिकारी कार्यकर्ता अकोला में हुए हड़ताल प्रदर्शन में शामिल हुए ऐसी जानकारी जिला अध्यक्ष मनीष रूल्हे ने दी है।
0 Comments