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Akola Dana Bazaar: आखिर..दाना बाजार की अतिक्रमण की गई दुकानों पर चला बुलडोजर.....! दुकानो का करोड़ों का नुकसान

Akola Dana Bazaar: आखिर..दाना बाजार की अतिक्रमण की गई दुकानों पर चला बुलडोजर.....! दुकानो का करोड़ों का नुकसान

अकोला:- शहर के दाना बाजार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. बुधवार 4 जनवरी की सुबह 5:00 से कड़े पुलिस बंदोबस्त के बीच महानगर पालिका द्वारा जेसीबी की सहायता से विवादास्पद 87 दुकानों का अतिक्रमण जमीनदोज किया गया. जिसके कारण दाना बाजार पूरी तरह से भंगार बाजार में तब्दील हो गया है. जिलाधिकारी नीमा अरोरा के निर्देश पर महानगर पालिका आयुक्त तथा प्रशासक कविता द्विवेदी ने 4 नवंबर को शहर के दाना बाजार में राजस्व विभाग के स्वामित्व वाली जमीन पर अवैध रूप से बनाए गई 87 दुकानों को हटाने की कार्रवाई आरंभ की थी. लेकिन बीच में ही यह कार्रवाई रोक दी गई थी. महानगरपालिका की सीमा में स्थित उत्तर जोन अंतर्गत शीट नंबर 39 बी, भूखंड नंबर 12 और 54/1 का स्वामित्व राजस्व विभाग के पास है. 


इस स्थान पर छोटे व्यापारियों को दैनिक व्यापार करने की अनुमति केवल सुबह से शाम तक चबूतरो पर व्यापार कर रात्रि में अपना माल घर वापस ले जाकर भूखंड खाली रखने की शर्त पर दी गई थी. पिछले कई साल से एक ही स्थान पर दुकान स्थापित कर रहे इन छोटे व्यवसायियों ने जिला प्रशासन, तत्कालीन नगर परिषद और वर्तमान महानगर पालिका प्रशासन के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मिलीभगत कर इन चबूतरो पर ईट -टीन और स्लैब की दुकानों का निर्माण किया था. वहीं इस मामले में संबंधित दुकानदारों की उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया था. बावजूद इसके यहां व्यापार जारी था. इस बीच एक शिकायतकर्ता ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की थी. 
जिसके बाद जिलाधिकारी नीमा अरोरा ने महानगर पालिका आयुक्त तथा प्रशासक कविता द्विवेदी को पत्र देकर दाना बाजार की 60 और सराफा बाजार की 27 इस प्रकार कुल 87 दुकाने निष्कासित कर इस कार्यवाही की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे जिसके बाद आयुक्त और प्रशासक कविता द्विवेदी ने 4 नवंबर को गाना बाजार की दुकानों को हटाने की कार्रवाई आरंभ की थी लेकिन बाद में कार्रवाई रोक दी गई थी. इसके बाद गाना बाजार के व्यापारियों ने राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास गुहार लगाई थी. मुख्यमंत्री महोदय ने नगर सचिव विभाग को 10 जनवरी 2023 तक इस मामले की रिपोर्ट भेजने को कहा था. परंतु जिलाधिकारी और महानगर पालिका आयुक्त ने बुधवार 4 जनवरी को भी सुबह से दाना बाजार की सभी दुकानों को ध्वस्त करने की कार्यवाही शुरू कर दी. जिसके कारण यहां के दुकानदारों में हड़कंप मच गया था. दुकानों का अतिक्रमण निकालने की भनक पाते ही दाना बाजार के दुकानदारों ने मंगलवार की रात से ही अपनी दुकानों को खाली करना शुरू कर दिया था. मंगलवार की रात से ही पुलिस ने दाना बाजार के बाहर बैरिकेड लाकर रख दिए थे. जिसके कारण दुकानदारों में भय का वातावरण निर्माण हो गया था. बुधवार 4 जनवरी की सुबह 5:30 बजे से ही पुलिस के साथ महानगरपालिका का अतिक्रमण दस्ता अपने लाव लश्कर के साथ यहां पहुंच गया था. जिसके बाद दुकानों का अतिक्रमण निकालने की कार्रवाई शुरू की गई. जो देर शाम तक चलती रही. पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी ना हो इसके लिए दाना बाजार की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेट्स के साथ पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त लगाया गया था. सुबह के समय कार्रवाई की जानकारी पाते ही दुकानदार और नागरिक बड़ी संख्या में यहां पहुंचे थे. गाना बाजार के दुकानदार अपनी दुकानों को बचाने के लिए प्रयास कर रहे थे. जिसके कारण दुकानदारों के साथ पुलिस और महानगर पालिका के कर्मचारियों के साथ तीखी बहस भी हुई थी. दुकानदारों और नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा था. कई साल से दाना बाजार का विवाद चल रहा था जिसके बाद यहां की सभी विवादास्पद 87 दुकानों को जेसीबी की सहायता से ध्वस्त कर दिया गया. जिसके कारण देखते ही देखते दाना बाजार भंगार बाजार में तब्दील हो गया. इस कार्रवाई के कारण दुकानदारों का करोड़ों रुपयों का नुकसान हो गया है. दाना बाजार की दुकानों को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कक्ष में व्यापारियों ने चर्चा की थी. जिसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रधान सचिव को इस मामले की जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे. और पत्र लिखकर 10 जनवरी 2023 तक इस मामले की रिपोर्ट पेश करने को कहा था. यह पत्र 30 दिसंबर 2022 को जिलाधिकारी को मिला था. बावजूद इसके 10 जनवरी 2023 तक समय रहने के बाद भी 4 जनवरी को ही अतिक्रमण को निष्कासित करने की कार्रवाई की गई. जब 40 साल तक यहां व्यवसाय करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो 10 जनवरी तक रुकने में क्या परेशानी थी? हम इस अन्याय कारक कार्यवाही को लेकर 10 जनवरी को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करेंगे. इस प्रकार की प्रतिक्रिया अकोला मुंसिपल प्लांट एसोसिएशन अकोला के अध्यक्ष विजय तिवारी ने व्यक्त की है.


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