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अकोला में शबे मेराज सादगी के साथ मनाई गई...!मुस्लिम समुदाय कोरोना की जंग में प्रशासन के साथ

अकोला में शबे मेराज सादगी के साथ मनाई गई...!
मुस्लिम समुदाय कोरोना की जंग में प्रशासन के साथ
अकोला- अकोला समेत पूरे भारत भर में कोरोना वायरस ने कोहराम मचाया हुआ है। लगातार तेजी से मरीज बढ़ रहे हैं जिसके मद्देनजर कोरोना के चलते इस वर्ष सभी  धर्मीय  त्योहार उत्सव, सभी कार्यक्रम सादगी के साथ मनाए जा रहे हैं। कोरोना का संक्रमण अब तक कम नहीं हुआ है तथा बड़े शहरों में  रोगियों की संख्या फिर से बढ़ रही है। जिसके चलते निर्माण हुई परिस्थिति का विचार करते हुए इस वर्ष शबे मेराज  सादगी के साथ मनाई गई।   मुस्लिम समुदाय द्वारा मस्जिदों में गर्दी अथवा भीड़ ना करते हुए अपने घरों में ही  नमाज, दुआ एवं कुराने पाक की तिलावत की गई तथा कोरोना वायरस भारत से चले जाने के लिए विशेष दुआओं का भी इंतजाम किया गया था। अकोला जिले के मुसलमानों ने जिला प्रशासन, मनपा प्रशासन, एवं पुलिस प्रशासन को अपना सहयोग करते हुए अमन व शांति तथा सादगी के साथ शबे मेराज की रात मनाई। मोहम्मद अली चौक जो कि  ऐसे पर्वों के अवसर पर रेल चेल वाला  परिसर है।
 शबे मेहराज हो या शबे बारात या शबे कद्र जहां पर रात भर मुस्लिम समुदाय के नागरिक  इकट्ठा होकर मस्जिदों में  इबादत जैसे नमाज़, दुआ एवं कुरान का पठन किया करते थे किंतु इस बार कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए  कच्ची मस्जिद, मरकज मस्जिद, जामा मस्जिद, काली मस्जिद आदि बड़ी मस्जिदों में कोरोना वायरस के चलते  सभी के लिए प्रवेश  प्रतिबंध  था। केवल कुछ लोगों की उपस्थिति में नमाज दुआएं एवं कुराने पाक का पठन किया गया इस वक्त पूर्णा नियमों का पालन भी बखूबी किया गया।  नमाजियों की संख्या कम होने के कारण मस्जिदे भी सुनसान नजर आई तथा मोहम्मद अली चौक परिसर मे भी सन्नाटा नजर आया। इसे देखकर ऐसा लग रहा था के कोरोना वायरस को हराने में जिला प्रशासन के साथ मुस्लिम समुदाय कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। कुछ नागरिकों का कहना यह भी था कि प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा निर्देश जब तक कोरोना वायरस का कहर हमारे अकोला से नहीं चला जाता हम पालन करते रहेंगे तथा प्रशासन को ऐसे ही सहयोग करते रहेंगे जिसकी सभी स्तर से सराहना हो रही है।

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