कर्णबधिर बालको के स्वास्थ हेतू वैद्यकिय कार्यशाला संपन्न
नवजात शिशु की ओएई श्रवण जाच आवश्यक
अकोला- कर्णबधीर बालको के विकासा हेतू विगत १५ वर्ष से कार्यरत स्थानिक जठारपेठ परिसर के एकवीरा मल्टिपर्पज फाउंडेशन की ओरसे प्रसूती शास्त्र के वैद्यकिय वर्ग हेतू नवजात बालको की ओएई जाच कार्यशाला संपन्न हुयी.इस कार्यशाला मे हिंदुजा हॉस्पिटल,मुंबई के वरिष्ठ ऑडीओलोजिस्ट राजेश पटाडीया ने मार्गदर्शन कर तज्ञो से संवाद साधा. नवजात बालक श्रवण जाच को ऑटोमेटेड ओटोकॉस्टिक उत्सर्जन अर्थात ओएई जाच कहा जाता हैं.इस जाच को कुछ मिनिट लगते हैं.इसमे बालक के कान मे एक छोटी सॉफ्ट-टिप्ड इअरपीस रखी जाती हैं और हलके से क्लिकिंग आवाज बजाये जाते हैं.यदी इस जाच मे स्पष्ट प्रतिसाद न मिला तो पुन: दूबारा जाच करना आवश्यक हैं.इस प्रकार से हर हजार बालको मे तीन से चार बालक यह कर्णबधीर निकलती हैं.आगे श्रवण प्रबंधन कर यह बालक सामान्य बालक समान बोल सकता हैं,पढाई कर स्वावलंबी हो सकता हैं. उक्त जाच नर्सिंग होम से डिस्चार्ज होने के पूर्व 48 से 72 घंटे के भीतर करनी चाहीये.इस समय राजेश पटाडीया ने इसके पश्चात की जानेवाली बेरा,अडिओ मेट्रिक जाच की जानकारी उपस्थित डॉक्टरो को दी .जन्मजात श्रवणशक्ती नष्ट होने के अनेक कारण हैं,किंतु इसपर अबतक कोई उपचार उपलब्ध नही हैं. स्पीच थेरपीसमेत कॉक्लियर इम्प्लांट एवं श्रवण यंत्र श्रवणक्षम बालको का जीवनमान एवं संवाद कौशल्य विकसित करने मे मदत करते हैं,ऐसा प्रतिपादन राजेश पटाडीया ने अपने मार्गदर्शन मे किया.संस्था संस्थापक श्रीकांत बनसोड ने कर्णबधीरत्व का बुनियादी परिणाम व्यापक होने से इसमे अन्य से संवाद करने की क्षमता विकसित न होने से बालको मे भाषा विकास के संदर्भ मे देरी होने की बात कही. इस कारण शैक्षिक, स्वाभिमान स्वावलंबन और सामाजिक कौशल्य पर भी किस तरह परिणाम होता हैं उसकी पर्याप्त जानकारी साझा की.इस समय संयोजक डॉ.सदानंद भुसारी महानगर मे नवजात बालको के लिये वैद्यकीय वर्ग ने श्रवण जाच उपक्रम चलाने का आवाहन किया. कार्यशाला मे गायनिक सोसा,आयएमए के पदाधिकारी, डॉ. शामकुमार शिरसाम, डॉ. प्रगती राखोंडे, डॉ. दृष्टि शाह, डॉ. साधना लोटे,डॉ. सीमा तायडे,डॉ. गीता भुसारी,डॉ.अंकुश अजमेरा,डॉ. अंकुश अगरवाल,डॉ. प्रेरणा जतकर, डॉ. हर्शल चीताडे, डॉ.के. साईनाथ,डॉ. जी.नव्या,संस्था अध्यक्ष हेमंत चौधरी, कोषाध्यक्ष प्रा.डॉ. आशिष कांडलकर , संस्थापिका सौ. सुचिता बनसोड एवं बालविकास प्रकल्प की संपूर्ण टीम उपस्थित थी.
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